नितीश कुमार ने पटना मेट्रो फेज‑1 का उद्घाटन, 3.6 किमी लाइन चलन में
नितीश कुमार ने 6 अक्टूबर को पटना मेट्रो फेज‑1 का उद्घाटन किया, 3.6 किमी की लाइन ISBT‑भूतनाथ को जोड़ती है, किराया ₹15‑₹30 और मधुबनी कला से सुसज्जित कोच।
और देखेंजब पटना मेट्रो, पटना शहर के भीतर आधुनिकीकरण का लक्ष्य रखने वाला शहरी रेल प्रोजेक्ट है. Also known as Patna Metro, it aims to reduce traffic congestion and boost economic activity. साथ ही स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, तकनीकी‑आधारित सिग्नल और टिकटिंग समाधान है और भौगोलिक योजना, रूट चयन में जनसंख्या घनत्व और भविष्य की विकास संभावनाओं को ध्यान में रखता है का उपयोग किया जा रहा है। यह तीनों घटक मिलकर स्मार्ट, सुरक्षित और तेज़ यात्रा अनुभव बनाते हैं।
पटना मेट्रो का पहला चरण दो लाइनें जोड़ता है: बोइरो‑हईदराबाद रूट, शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों को जोड़ता है और रिवरफ्रंट रूट, गंगा किनारे के आवासीय और शैक्षणिक क्षेत्रों का कनेक्शन प्रदान करता है. इन रूटों ने स्थानीय लोगों को आवास‑से‑काम की दूरी को आधा कर दिया है, जिससे दैनिक यात्रा का समय 30‑45 मिनट घट गया है। इस बदलाव ने रियल एस्टेट मूल्य में 12‑15% की बढ़ोतरी भी देखी है।
एक महत्वपूर्ण संबंध यह है कि पटना मेट्रो भारतीय रेल नेटवर्क के साथ इंटरकोंनेक्टेड ट्रांसपोर्ट, आखिरी मील कनेक्टिविटी के लिये बस, टैक्सी और साइकिल‑शेयरिंग को समेकित करता है. इस एकीकरण से यात्रियों को एक ही टिकट में कई मोड्स का इस्तेमाल करने का विकल्प मिलता है। साथ ही, प्रोजेक्ट ने पर्यावरणीय स्थिरता, उत्सर्जन घटाने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिये सौर पैनल और रेगेनरेंट ब्रेकिंग प्रणाली अपनाई है, जिससे हर साल लगभग 1.5 मिलियन टन CO₂ बचाने की संभावना है।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो पटना मेट्रो ने स्थानीय रोजगार, निर्माण, संचालन और रख‑रखाव में 8,000 से अधिक नौकरियां पैदा की हैं. इन नौकरियों में इंजीनियर, सुरक्षा गार्ड, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अलावा, मेट्रो स्टेशनों के आसपास छोटे‑मोटे व्यापारियों के लिए किराया के तौर‑तरीके आसान हुए हैं, जिससे स्थानीय उत्पादों की बिक्री में 20% की बढ़ोतरी हुई है।
सुरक्षा पहलू को भी नजरअंदाज नहीं किया गया है। मेट्रो ने सुरक्षा निगरानी प्रणाली, सीसीटीवी, फ़ेसियल रिकॉग्निशन और वास्तविक‑समय अलर्ट के साथ एकीकृत है. इसके साथ ही, प्लेटफ़ॉर्म पर आधुनिक एस्केलेटर, विकलांग यात्रियों और बुज़ुर्गों के लिये सुगम प्रतिस्थापन प्रदान करता है. इस तरह के उपायों ने दुर्घटना दर को 75% तक घटा दिया है।
भविष्य की आगे की योजना भी स्पष्ट है। अगली दो साल में पटना मेट्रो का विस्तार तीसरी लाइन, शहर के दक्षिणी औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने के लिये प्रस्तावित है और मौजूदा रूटों की क्षमता को 30% तक बढ़ाने के लिये नई ट्रेन सेटों की खरीद की जाएगी। इससे औसत सीट उपलब्धता 85% से बढ़कर 95% तक पहुंच जाएगी। इस विस्तार से द्वितीयक शहरों जैसे नालंदा और अरहर को भी मेट्रो के माध्यम से सीधे जोड़ने की संभावना बनी है।
समुदाय सहभागिता की बात करते हुए, प्रोजेक्ट टीम ने जनसंपर्क कार्यशालाएँ, स्थानीय नागरिकों के सवालों के जवाब और फीडबैक एकत्र करने के लिये आयोजित की हैं. इन सत्रों से मिली राय ने स्टेशन डिजाइन में एक्सेसरी सुविधाओं जैसे शीघ्र चार्जिंग पॉइंट, मुफ्त वाई‑फाई और बच्चों के लिए खेल क्षेत्र शामिल किए हैं। इस रुचि‑समर्थन ने यात्रियों की संतुष्टि स्तर को 4.5/5 तक बढ़ा दिया है।
पुनः कहें तो, पटना मेट्रो सिर्फ एक परिवहन प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक समग्र शहरी विकास का इंजन है। इसके द्वारा स्थापित किए गए इको‑फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा‑संचयन, जल‑प्रबंधन और ग्रीन स्पेस के साथ शहर को पर्यावरणीय रूप से बेहतर बनाता है. यह सभी तत्व मिलकर पटना को भारत के तेज़ी से बढ़ते स्मार्ट सिटीज़ में शामिल करते हैं।
अब आप नीचे के लेखों में पाएँगे कि कैसे पटना मेट्रो ने स्थानीय जीवन को बदल दिया, नई तकनीकों ने संचालन को कैसे आसान बनाया और आने वाले वर्षों में कौन से बड़े बदलाव की अपेक्षा की जा रही है। इन कहानियों को पढ़कर आप खुद को एक अधिक सूचित यात्री या शहर के हितधारक के रूप में तैयार कर सकते हैं।
नितीश कुमार ने 6 अक्टूबर को पटना मेट्रो फेज‑1 का उद्घाटन किया, 3.6 किमी की लाइन ISBT‑भूतनाथ को जोड़ती है, किराया ₹15‑₹30 और मधुबनी कला से सुसज्जित कोच।
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