बांग्लादेश: शेख हसीना को जनहित में अपराध के लिए मृत्युदंड की सजा

बांग्लादेश: शेख हसीना को जनहित में अपराध के लिए मृत्युदंड की सजा
18 नवंबर 2025 0 टिप्पणि आर्य वरदान नागपाल

2025 की 17 नवंबर की रात लगभग शून्य बजकर 58 सेकंड पर, अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ हुई निर्मम दमन अभियान के लिए जनहित में अपराध के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई। यह फैसला बांग्लादेश के इतिहास में सबसे बड़े राजनीतिक ट्रायलों में से एक है — जहां एक सत्तारूढ़ नेता को उसी न्यायाधिकरण के सामने लाया गया, जिसे उसने 2010 में खुद बनाया था।

क्या हुआ था जुलाई-अगस्त 2024 में?

सब कुछ जुलाई 2024 में शुरू हुआ, जब बांग्लादेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में 30% कोटा बहाल कर दिया — जो मुक्ति सेनानी के बच्चों के लिए था। छात्रों ने इसे राजनीतिक नकली विशेषाधिकार बताया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन तेज हुए, लेकिन पुलिस और राष्ट्रीय रक्षा बलों ने अत्यधिक बल का उपयोग किया। अमनीस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, कम से कम 1,200 छात्र मारे गए, 8,000 से अधिक घायल हुए, और 3,500 से ज्यादा लोग गायब हो गए। इस दमन के बाद हसीना अगस्त 2024 में भारत भाग गईं। उनके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने अस्थायी सरकार की अगुआई की।

न्यायाधिकरण का 453 पेज का फैसला

न्यायाधिकरण का फैसला 453 पेज का था, जिसमें ढाका के न्यायालय के बाहर तीव्र सुरक्षा व्यवस्था के बीच पढ़ा गया। फैसले का आधार था रोम स्थित अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के रोम स्टैच्यूट का अनुच्छेद 7 — जो जनहित में अपराध की परिभाषा देता है। न्यायाधीशों ने कहा कि हसीना ने सुरक्षा बलों के अतिक्रमण को नजरअंदाज किया, और अपनी नेतृत्व जिम्मेदारी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यह एक व्यवस्थित योजना थी, जिसमें पुलिस, गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी शामिल थे।

पूर्व पुलिस प्रमुख को केवल पांच साल की सजा हुई — क्योंकि उन्होंने जांच में सहयोग किया। लेकिन हसीना और कमाल के खिलाफ सबसे कठोर सजा दी गई। न्यायाधिकरण ने उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया, जिसे बलिदानी परिवारों को क्षतिपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

अदालती प्रक्रिया पर सवाल

यहां एक बड़ी बात है — यह ट्रायल अनुपस्थिति में हुआ। हसीना ने कभी अदालत में अपनी बात नहीं रखी। उनके लिए एक न्यायालय द्वारा नियुक्त वकील था, लेकिन अमनीस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, उन्हें बचाव तैयार करने के लिए बहुत कम समय मिला। किसी भी साक्ष्य की जांच नहीं हुई, जो आरोपों के खिलाफ था।

“यह इतनी बड़ी और जटिल मामले में इतनी तेजी से फैसला देना, न्याय की बुनियादी बातों को तोड़ता है,” अमनीस्टी के महासचिव अग्नेस कलामार्ड ने कहा। “इस तरह के फैसले को न्याय के नाम पर नहीं, बल्कि बदला लेने के नाम पर देखा जा सकता है।”

ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी बताया कि हसीना के शासनकाल में इसी न्यायाधिकरण ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन किया था। अब जब यही न्यायाधिकरण उनके खिलाफ फैसला दे रहा है, तो सवाल यह उठता है: क्या यह न्याय है, या राजनीतिक बदला?

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया: न्याय या बदला?

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया: न्याय या बदला?

वोल्कर टर्क, यूएन मानवाधिकार आयोग के प्रमुख, ने कहा कि यह फैसला “पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण” है, लेकिन उन्होंने मृत्युदंड के खिलाफ अपनी स्थिति दोहराई। “हम जीवन के लिए अपराध के लिए मृत्युदंड का विरोध करते हैं — किसी भी परिस्थिति में,” उन्होंने कहा।

उन्होंने बांग्लादेश को एक “सच्चाई, क्षतिपूर्ति और न्याय की व्यापक प्रक्रिया” की ओर बढ़ने का आह्वान किया। “न्याय के बिना, शांति अस्थायी है। बांग्लादेश के भविष्य के लिए, यह अपराध की जिम्मेदारी और न्याय ही एकमात्र रास्ता है,” टर्क ने कहा।

यूएन ने पहले ही फरवरी 2025 में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन लोगों ने आदेश दिए थे — चाहे वे सीधे गोली मार रहे हों या ऊपर से आदेश दे रहे हों — उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।

अभी भी तीन मामले लटके हैं

हसीना के खिलाफ अभी भी तीन और मामले लटके हैं: दो मामले उनके शासनकाल के दौरान हुए अनिवार्य अपहरणों से जुड़े हैं, और एक मामला 2013 में ढाका में हुए राजनीतिक हत्याकांड से। इन सभी मामलों में न्यायाधिकरण ने उनके खिलाफ साक्ष्य जमा किए हैं। अगर वे कभी बांग्लादेश लौटती हैं, तो उन्हें इन मामलों में भी फंसाया जा सकता है।

क्या अब उनकी पार्टी, अवामी लीग, भी बंद कर दी जाएगी? न्यायाधिकरण ने अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं किया। लेकिन 2025 के संशोधनों ने न्यायाधिकरण को राजनीतिक दलों को भंग करने की शक्ति दे दी है — जिसे मानवाधिकार संगठन आजादी के अधिकार के उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं।

क्या अब होगा?

क्या अब होगा?

बांग्लादेश में अभी एक अस्थायी सरकार है, जिसकी अगुआई मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि न्याय का रास्ता जारी रहेगा। लेकिन बाहरी दुनिया देख रही है — क्या यह न्याय है, या राजनीतिक बदला? क्या यह वास्तव में शांति की ओर ले जाएगा, या नई विभाजन की शुरुआत होगी?

एक बात तो तय है — बांग्लादेश का राजनीतिक चेहरा अब कभी वैसा नहीं होगा। छात्रों ने अपनी जान दी। एक प्रधानमंत्री को मृत्युदंड हुआ। और देश अब एक नए युग में प्रवेश कर रहा है — जहां न्याय की आशा और डर दोनों एक साथ बसे हुए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या शेख हसीना के खिलाफ फैसला न्यायपालिका की स्वतंत्रता का प्रमाण है?

यह सवाल बहुत जटिल है। न्यायाधिकरण ने हसीना के शासनकाल में भी विपक्षी नेताओं के खिलाफ अन्यायपूर्ण फैसले दिए थे। अब जब वही न्यायाधिकरण उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, तो यह न्याय का संकेत नहीं, बल्कि राजनीतिक बदले का संकेत लग सकता है। अमनीस्टी और यूएन दोनों ने इस ट्रायल की तेजी और अनुपस्थिति में न्याय के बारे में चिंता जताई है।

मृत्युदंड क्यों दिया गया, जबकि यूएन इसका विरोध करता है?

बांग्लादेश के कानून में मृत्युदंड कानूनी रूप से मान्य है, और न्यायाधिकरण ने इसे जनहित में अपराध के लिए सबसे कठोर दंड माना। लेकिन यूएन के अनुसार, मृत्युदंड किसी भी परिस्थिति में न्याय नहीं है। वोल्कर टर्क ने कहा कि वास्तविक न्याय के लिए सच्चाई, क्षतिपूर्ति और आत्म-सुधार की आवश्यकता है — न कि एक फांसी।

हसीना भारत में हैं — क्या उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है?

भारत और बांग्लादेश के बीच अभी तक कोई अपराधी निकासी समझौता नहीं है। भारत ने अभी तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया है। लेकिन अगर बांग्लादेश ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय तलाशी घोषित कर दिया, तो भारत को अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण उन्हें गिरफ्तार करना पड़ सकता है। वर्तमान में, वे भारत में निजी जीवन जी रही हैं।

छात्रों के परिवारों को क्या मिलेगा?

न्यायाधिकरण ने हसीना और कमाल की संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया है — जिसमें घर, बैंक खाते और जमीन शामिल है। यह संपत्ति उन परिवारों को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी, जिनके प्रियजन उस दमन में मारे गए या गायब हुए। अभी तक 1,200 परिवारों को आधिकारिक तौर पर पहचाना गया है, लेकिन अनुमान है कि यह संख्या 2,500 तक जा सकती है।

क्या अवामी लीग को भी बंद कर दिया जाएगा?

अभी तक न्यायाधिकरण ने अवामी लीग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। लेकिन 2025 के संशोधनों ने इस न्यायाधिकरण को राजनीतिक दलों को भंग करने की शक्ति दे दी है। यदि अस्थायी सरकार ने उसे खतरा माना, तो यह अगला कदम हो सकता है। लेकिन यह राजनीतिक रूप से बहुत खतरनाक होगा — क्योंकि अवामी लीग अभी भी देश की सबसे बड़ी पार्टी है।

इस घटना का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

भारत ने शेख हसीना को आश्रय दिया है, लेकिन अब यह एक राजनीतिक बोझ बन सकता है। बांग्लादेश के नए नेतृत्व के साथ भारत के संबंध मजबूत हो सकते हैं, लेकिन यदि अवामी लीग को भंग कर दिया जाता है, तो भारत के लिए बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे भारत की सीमा पर अस्थिरता बढ़ सकती है — जिसका असर सुरक्षा और शरणार्थी प्रवाह पर पड़ेगा।